ज़िन्दगी और मौत एक ही सिक्के के अभिन्न पहलू है . ज़िन्दगी ख़तम होने पर ही मौत नहीं आती दोनों साथ साथ चलती है ,कितने फिलोसोफिकल विचार पेश किये है आपने. हर सुबह जीने के लिए हर शाम हम क्यों मरते है. कितना सही लिखा है हम जिंदगी और मौत से हर पल लड़ते है अनेकानेक शुभकामनायें
Sonal ! Congratulations for writing in Hindi font now...and many more congratulations for writing such a deep poem...you are a great poet..that too of my liking....I wish you the best...
5 comments:
ज़िन्दगी और मौत एक ही सिक्के के अभिन्न पहलू है . ज़िन्दगी ख़तम होने पर ही मौत नहीं आती दोनों साथ साथ चलती है ,कितने फिलोसोफिकल विचार पेश किये है आपने.
हर सुबह जीने के लिए
हर शाम हम क्यों मरते है.
कितना सही लिखा है हम जिंदगी और मौत से हर पल लड़ते है
अनेकानेक शुभकामनायें
Sonal ! Congratulations for writing in Hindi font now...and many more congratulations for writing such a deep poem...you are a great poet..that too of my liking....I wish you the best...
मौत एक सचाई हे और इंसान इस सचाई को सामने रख कर अपनी जिंदगी बसर करे तो सायद इंसानी जिंदगी का रुख ही बदल जाए...सुंदर अभिव्यक्ति सोनल जी.............
very different blog !
keep it up !
naye roop me blog ko dekh kar achchha laga
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