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* माँ *


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2 Response to "* माँ *"

  1. मीत says:
    Oct 7, 2008 7:05:00 PM

    जिसकी मौजूदगी फैलती जीवन में. वो ख़ुशी है माँ....
    बहुत सुंदर...
    माँ के लिए जितना कहा हाय कम है...

  2. "SURE" says:
    Oct 7, 2008 7:34:00 PM

    " माँ " पर आपकी रचना बहुत अच्छी लगी.....माँ की महिमा जितनी की जाए उतनी कम है क्योंकि
    धरती पे खुदा का साक्षात् रूप है माँ
    धूप में छाँव तो,सर्दियों में धूप है माँ