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* माँ *


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3 comments:

मीत said...

जिसकी मौजूदगी फैलती जीवन में. वो ख़ुशी है माँ....
बहुत सुंदर...
माँ के लिए जितना कहा हाय कम है...

"SURE" said...

" माँ " पर आपकी रचना बहुत अच्छी लगी.....माँ की महिमा जितनी की जाए उतनी कम है क्योंकि
धरती पे खुदा का साक्षात् रूप है माँ
धूप में छाँव तो,सर्दियों में धूप है माँ

abhishek said...

really niceyaar.very nice poem abt maa

thanx for ur nice comment on my blog:)

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