जिसकी मौजूदगी फैलती जीवन में. वो ख़ुशी है माँ....बहुत सुंदर...माँ के लिए जितना कहा हाय कम है...
" माँ " पर आपकी रचना बहुत अच्छी लगी.....माँ की महिमा जितनी की जाए उतनी कम है क्योंकि धरती पे खुदा का साक्षात् रूप है माँधूप में छाँव तो,सर्दियों में धूप है माँ
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Oct 7, 2008 7:05:00 PM
जिसकी मौजूदगी फैलती जीवन में. वो ख़ुशी है माँ....
बहुत सुंदर...
माँ के लिए जितना कहा हाय कम है...
Oct 7, 2008 7:34:00 PM
" माँ " पर आपकी रचना बहुत अच्छी लगी.....माँ की महिमा जितनी की जाए उतनी कम है क्योंकि
धरती पे खुदा का साक्षात् रूप है माँ
धूप में छाँव तो,सर्दियों में धूप है माँ